
देश के विभिन्न भागों में कोविड-19 के बढ़ते प्रकोपों के समय, जयपुर में संक्रमण से लिप्त एक और मौत हो गई। मृतक एक 26 वर्षीय युवक था, जो जयपुर का निवासी था और दो महीनों से उस पर हॉस्पिटल में टीबी सहित कोविड ने संक्रमित करने के कई तरह की बीमारियों का इलाज चल रहा था। 24 मई को उसकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 25 मई को मौत हो गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को इसकी पुष्टि की।
प्रदेश में सोमवार को कोरोना के आठ नए मामले आये। इन मामलों में चार जोधपुर से, तीन जयपुर से और एक उदयपुर से आया। अब तक इस वर्ष राजस्थान में कुल २५ कोरोना संक्रमित मिले हैं। बढ़ते मामलों ने फिर से सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता जताई है।
कम खतरनाक है नया वैरिएंट, पर निगरानी जरूरी
फिलहाल वैसे तो कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। नए केसों में जो वैरिएंट सामने आ रहा है, वह घातक नहीं है। डॉक्टरों का मानना है कि ज्यादातर केस में JN.1 वैरिएंट पाया जा रहा है, जोकि ओमिक्रोन के बीए.2.86 प्रकार से विकसित हुआ है। इस बात से तो कम से कम दिलासा दी जा सकती है कि यह वैरिएंट ज़्यादातर केसों में गंभीर लक्षण प्रकट नहीं कर रहा है और कॉन्फर्म केस होम आइसोलेशन के अंतर्गत ठीक हो रहे हैं।
फिर भी सावधानी बरतें
खतरा कम होने के बावजूद भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना, दवा को बार-बार साफ करना, किसी भी प्रकार के लक्षण के प्रकट होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने को अभी भी बहुत जरूरी समझा जा रहा है।
भारत में सबसे अधिक कोविड मामलों की पाए जाने की मान्यता के लिए JN.1 वैरिएंट प्रभावित है, जो कि लगभग 53 प्रतिशत नमूनों में पाया गया है। इसके बाद बीए.2 (26%) और अन्य ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20%) केस हैं।
जाहिर है, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बात की पुष्टि की है कि, फिलहाल न तो जीएन.1 और न ही उससे संबंधित विपर्याय के स्तर पर जोखिम को ज्यादा बड़ा मानने का मामला नहीं है, लेकिन इसके लिए सतर्कता और निगरानी अभी भी बहुत जरूरी बनी हुई है।



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