राजस्थान में भजनलाल सरकार ने ओबीसी आरक्षण के लिए ‘राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग’ का गठन किया है। रिटायर्ड जज मदनलाल आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं। जानिए आयोग की भूमिका और भविष्य की नियुक्तियों की तैयारी।
राजस्थान में ओबीसी आरक्षण के लिए नया आयोग गठित, राजनीतिक नियुक्तियों का दौर फिर शुरू
रिपोर्ट: जयपुर मिरर लाइव न्यूज डेस्क | जयपुर

भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार में एक बार फिर राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। इस कड़ी में सरकार ने पंचायत और शहरी निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण देने के लिए राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन किया है।
इस आयोग में सेवानिवृत्त जिला जज मदनलाल को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो पाली जिले के सोजत क्षेत्र से हैं। उनके साथ आयोग में चार सदस्य भी शामिल किए गए हैं—मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपालकृष्ण, और पवन मांडविया। इन नियुक्तियों के आदेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका द्वारा जारी किए गए हैं।
आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगर निकायों में ओबीसी जातियों के लिए आरक्षण का व्यावहारिक फार्मूला तैयार करना होगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी चुनावों में आरक्षण लागू किया जाएगा। हालांकि, अभी तक आयोग के कार्यकाल की स्पष्ट जानकारी आदेशों में नहीं दी गई है।
🔍 जल्द ही अन्य बोर्डों और आयोगों में भी होंगी नियुक्तियाँ
भजनलाल सरकार जल्द ही बोर्ड, आयोग और निगमों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक नियुक्तियाँ करने की तैयारी में है। भाजपा के कार्यकर्ता और नेता इस प्रक्रिया को लेकर सक्रिय हैं और इसके लिए जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग कर रहे हैं। सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा की गई राजनीतिक नियुक्तियों को निरस्त कर दिया था।
राज्य में इन नई नियुक्तियों को आगामी चुनावी तैयारियों और सामाजिक संतुलन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।



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